Shiv Shankar:Rudra bhi,Bhole bhi
सावन का दूसरा सोमवार आप के लिए मंगलमय हो !भगवन रूद्र के बारे में पुराणों में कहा गया है कि तीनो श्रृष्टि संचालक महादेवो में इनका कार्य विनाश का है ।अर्थात ये हर वस्तु के नये सृजन और उसके उनुप्योगिता पर उसका विनाश की जिम्मेदारी रखते है ।
शिव जी के बारे में खा गया है की संहारक होने के कारण यू तो ये प्रचंड है पर साथ साथ ये अति दयालु स्वभाव के है ,भक्तो पर शीघ्र ही प्रसन्न हो है ।इस सम्बन्ध में आप को एक प्रचलित दंतकथा सुनाता हु ।
"एक बार एक व्यक्ति का पूरा परिवार चक्रवात में फसकर उस से दूर हो गया ।अकेलेपन और परिवार के के वियोग में वो मंदिर में जाता और रोज शिवलिंग पर छड़ी से प्रहार करता !एसा वो रोज करता ,एक जब उसने छड़ी चलायी तो वो किसी के पैर पर जा लगी।जब सामने देखा तो एक योगी खड़ा था ।वो विस्मय से उन्हें एकटक देखता रहा तो
शिव जी बोले "बेटा तुम्हारी नियमतः आराधना से मै अति प्रसन्न हु ,कोई वरदान मांगो "।ये सुनकर वो व्यक्ति बोला"" भगवन मै तो लज्जित हु,छोभ्वश मैंने ये पाप किया "।शिव जी:"बेटा ,तुम जब भी छड़ी से मुझ पर वार करते ऊपर लगे बेलपत्र मुझ पर गिरते!ये बेलपत्र मुझे अति प्रिय है और क्युकी तुमने इसे नियमतः इतने दिन तक किया है मै तुम पर प्रसन्न हु।वर मांगो "।इसके पश्चात उसने अपना खोया परिवार माँगा,शिव से उसका पारिवार जो चक्रवात में फसकर कही दूर उड़कर चला गया था उसे वापस मिल गया।"
ऐसा माना जाता है की सावन के में शिव जी पृथ्वी पर निवास करते है ।सोमवार इनका प्रिय वार,बेलपत्र ,भांग,धतुर ,शामी के पत्ते इनको अति प्रिय है।कहा जाता है कि पार्वती जी ने इन्ही सब वस्तुओं से शिव जी को पाने के लिए जंगल में तप किया था ।
आप लोग भी कृपालु है सच्चे और निर्मल मन के साथ भोले शंकर की आराधना करे ।शिव बहुत भी कृपालु है ।शिव आप का और विश्व का कल्याण करे ।

.jpg)
"ॐ नमः शिवाय "
No comments:
Post a Comment