शुभ प्रभात !कल NDTV न्यूज़ चैनल पर ममता फिर ब्रेकिंग न्यूज़ का हिस्सा बनी ।कारण फिर से वही नौटंकी की हम प्रणब मुखेर्जी को समर्थन नही देंगे ।आपको याद होगा की की कुछ दिन पहले ही इन्होने इसी नौटंकी की थी और एस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह से भी मिली थी ।करीबन 48 घंटे बाद ये मान गयी ।फिर दुबारा ये भांडपन क्यों?क्या दीदी को रूठने मनाने के खेल में मजा आता है?या दीदी हमेसा सुर्खियों में रहना चाहती है ?या फिर उन्होंने प्रणब डा को सिर्फ इसलिए समर्थन दे दिया ताकि इतिहास में पहली बार एक बंगाली व्यक्ति राष्ट्रपति बन सके ??वैसे सच बताऊ तो भाजपा शासन में राष्टपति चुनाव में छिछोरी राजनीति नही दिखती थी ।
विशेषज्ञों की राय माने तो इस नौतानको की पीछे ममता और प्रणब के व्यक्तिगत मतभेद है ।दीदी ने पत्रकारों से भी यही कहा कि ये समर्थन का फैसला हुम अपनी ख़ुशी से नही कर है बल्कि देश व लोगो के हित को देखते रखते हुए कर रहे है ।उन्होंने ने ये भी कहा की इस से प्रणब को फायदा होगा पर उनके पास कोई अन्य विकल्प नही है ।उन्होंने ने अपने बयाँ में कहा की वो चाहती थी के एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति चुनाव के उम्मेदवार बने ।(सराहनीय ) ।बताते है की UPA के दुबारा में आने के बाद के 18 महीने के कार्यकाल में ये दोनों लोगो 18 से 20 बार सामने हुए पर दोनों ने एक दुसरे से कोई बातचीत नही की ।
बताना जरूरी है की बंगाल की दीदी तृणमूल कोंग्रेस की अध्यक्ष है तथा इस पार्टी के 19 सांसद
लोक सभा में और 9 राज्य सभा में है ।UPA गठबंधन की ये के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और
इसीलिए कांग्रेस इनके तलवे चाटने के लिए मजबूर है ।
वैसे जो भी हो प्रणब मुखेर्जी के दिन बहुरने वाले है ,UPA के प्राप्त समर्थन से उनका राष्ट्रपति बन ना तो तय है ।जब वो प्रतिभा सिंह पाटिल जैसी निष्क्रिय महिला को राष्ट्रपति है तो प्रणब तो फिर भी सक्रिय रहे है ।
Articles concerned with this issue:
http://technorati.com/politics/article/6-reasons-why-mamta-banerjee-of/
विशेषज्ञों की राय माने तो इस नौतानको की पीछे ममता और प्रणब के व्यक्तिगत मतभेद है ।दीदी ने पत्रकारों से भी यही कहा कि ये समर्थन का फैसला हुम अपनी ख़ुशी से नही कर है बल्कि देश व लोगो के हित को देखते रखते हुए कर रहे है ।उन्होंने ने ये भी कहा की इस से प्रणब को फायदा होगा पर उनके पास कोई अन्य विकल्प नही है ।उन्होंने ने अपने बयाँ में कहा की वो चाहती थी के एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति चुनाव के उम्मेदवार बने ।(सराहनीय ) ।बताते है की UPA के दुबारा में आने के बाद के 18 महीने के कार्यकाल में ये दोनों लोगो 18 से 20 बार सामने हुए पर दोनों ने एक दुसरे से कोई बातचीत नही की ।
बताना जरूरी है की बंगाल की दीदी तृणमूल कोंग्रेस की अध्यक्ष है तथा इस पार्टी के 19 सांसद
लोक सभा में और 9 राज्य सभा में है ।UPA गठबंधन की ये के दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और
इसीलिए कांग्रेस इनके तलवे चाटने के लिए मजबूर है ।
वैसे जो भी हो प्रणब मुखेर्जी के दिन बहुरने वाले है ,UPA के प्राप्त समर्थन से उनका राष्ट्रपति बन ना तो तय है ।जब वो प्रतिभा सिंह पाटिल जैसी निष्क्रिय महिला को राष्ट्रपति है तो प्रणब तो फिर भी सक्रिय रहे है ।
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