प्रणाम पाठको ! ये विषय उत्तेजक और बहस के काबिल है ।विषय है की क्या मुलायम सिंह यादव हिन्दू विरोधी है या मुसलमानों के पछधर ??ये विषय उठा है हाल में ही निकली खबर जिसमे मुलायम ने फसबूक पर विरोधी पोस्ट्स पर आदती व्यक्त करते हुए ये खा की वो इस बारे में प्रधानमंत्री से मिलेंगे और इसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नियत्रण की बात कहेंगे ।इस पर सवाल ये उठता है की क्या मुलायम जी को फेसबुक पर हिन्दू विरोधी पोस्ट्स नही दिखे ,क्यो' वो हमेशा मुस्लिम आरक्षण की बाते करते रहते है,???
उत्तर ये है की वो एसा कर के अपना मुस्लिम बैंक सुरछित करना चाहते है ।उनका सपना अब प्रधानमंत्री बनने का है ।वो नरेन्द्र मोदी को तो ये कह कर प्रधानमंत्री पद के अयोग्य बताते है की देश का प्रधानमंत्री सेकुलर होना चाहिए ।मुलायम जी आप क्या खुद सेकुलर है ???
ये पहली बार नही हुआ है ।बात तब की है जब मुलायम रक्षा मंत्री थे ,इन्होने पाकिस्तान को दो हजार करोड़ की आर्थिक सहायता देने का बयां था ।बताया जाता है ये सब इन्होने अपने मंत्री आज़म खान के कहने पर किया जो की मुस्लिम वोट बैंक की कुंजी है ।असल बात तो ये है की ये नेता लोग समाज को युही धर्म और जाती के मुद्दों पर उलझा कर अपने वोते बैंक और का उल्लू सीधा करते है ।ना इनकी कोई जाति होती है ना मजहब ।
"शायद आप भूल गये होंगे पर ये वही आजम खान है जिसने भारत माता को डायन कहा था "।मै पूछता हु क्या जरूरत है मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देने की ???
- भारत में हिन्दुओ के बाद सबसे ज्यादा संख्या में कोई समुदाय है तो वो मुस्लिम है ।
- मुस्लिम हमारी संस्कृति का एक हिस्सा है ।देश पर सालो तक इनका राज था ,पता नि कितनी सदियों से ये हमारे साथ रह रहे है ।फिर ये परायेपन का भाव क्यों?
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