देश समाज से बनता है,,समाज लोगो से ,समाज की ईकाई हुआ एक व्यक्ति ।मनुष्य चाहे जो कोई भी हो ,उसके अन्दर कुछ बाते समान है -प्रेम ,इर्ष्या ,करुणा आदि ।ये मनुष्य की कुछ मूलभूत प्रवृतिया है ।समाज के प्रशाषक वर्ग का कर्त्तव्य है समाज में सौहार्द बना कर रखना ताकि देश में भी सौहार्द और अखंडता का परिवेश रहे ।ऐसा करने के लिए अतिआवश्यक है की सभी लोगो को समान अवसर मिले -चाहे वो जीवनयापन के हो या उन्नति के ।एक शांतिपूर्ण समाज ही एक अखंड और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकता है । समाज और देश के लिए ये एक आदर्श नियम है ।
आइये देखते आज भारत में क्या हो रहा है ?आज भारत कई टुकडो में बट चुका है ,बाटा है आज के सत्ता लोलुप इन नेताओ ने । कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर,तो कभी भाषा के नाम पर ।आज इन्होने आरक्षण की इसी गन्दी राजनीति शुरू कर दी है की लोग वर्गों में बात है ,हर रोज़ एक नया गुट रेल लाइन पर जाके बैठ जाता है ।मै कहता हु दोष इन लोगो नही इन भेड़िया रूपी राजनेताओ का है जो समाज को भेड़ समझ इसे अपनी बातो में बहका ले जाते है और सत्ता मिलने पर रोज एक भेड़ खाने का कानून बना लेते है ।
एक सामान्य स्थिति आपको समझता हु की आपने स्वयं देखा होगा की एक ही माँ के दो बेटो में मनमुटाव तब हो जाता है जब जब माँ किसी कारण वश एक को ज्यादा लाड करने लगती है ,तो आप सोचिये की जब समाज के कई वर्ग बनाकर अगर आप एक के हित का सदैव हनन कर वर्गों को सुविधाए देते रहेंगे तो समाज में और अंततः देश में कहा से शांति स्थापित रहेगी ???
आज सामान्य वर्गीय लोगो का असंतोष चरम पर है । हाड़तोड़ मेहनत कर बेरोजगारी का तमाचा पुरस्कार के रूप में पा रहा ये वर्ग ज्यादा दिन अब ये तानशाही नही बर्दाश्त कर सकेगा ।आज आन्दोलन भ्रस्टाचार मिटाने को हो रहा है कल आरक्षण मिटने को होकर रहेगा ।वो तो कहिये की गाँधी की परंपरा हर भारतीय में जीवित है और हम लोकतंत्र का सम्मान करते है नही तो भारत को भी सीरिया और मिस्त्र में बदलने से कोई रोक नही सकता था ।आज आंबेडकर ,मायावती और नेहरु की मुर्तिया तोड़ी जा रही है।कल इन नेताओ को तोडा जाएगा ।ये नेता कहते है की मुर्तिया तोड़ कुछ लोग माहौल बिगड़ने की कोसिस कर रहे है ।मै कहता हु की माहौल तो तभी बिगड़ गया था जब आपने जबरन जनता की सहमती के ये मुर्तिया लगवाई थी ।एक सच्चे नेता की मुर्तिया लगवाने की जरूरत नही होती उसकी प्रतिमा तो लोगो के दिलो में लगी होती है ।जाकर देख आइये अटल बिहारी जी ने कही अपनी प्रतिमा लगवाई है ,की वल्लभ भाई पटेल जी कही अपने पार्क बनवाए है और 12 मुर्तिया लगवाई हो !नही न !पर जाकर लीजिये आज देश का हर बच्चा इनको जानता है ।
याद रखना ऐ भांड राजनेताओ परशुराम सामान्य वर्ग से ही थे और होंगे ।।
जय हिंद ।।
आइये देखते आज भारत में क्या हो रहा है ?आज भारत कई टुकडो में बट चुका है ,बाटा है आज के सत्ता लोलुप इन नेताओ ने । कभी धर्म के नाम पर तो कभी जाति के नाम पर,तो कभी भाषा के नाम पर ।आज इन्होने आरक्षण की इसी गन्दी राजनीति शुरू कर दी है की लोग वर्गों में बात है ,हर रोज़ एक नया गुट रेल लाइन पर जाके बैठ जाता है ।मै कहता हु दोष इन लोगो नही इन भेड़िया रूपी राजनेताओ का है जो समाज को भेड़ समझ इसे अपनी बातो में बहका ले जाते है और सत्ता मिलने पर रोज एक भेड़ खाने का कानून बना लेते है ।
एक सामान्य स्थिति आपको समझता हु की आपने स्वयं देखा होगा की एक ही माँ के दो बेटो में मनमुटाव तब हो जाता है जब जब माँ किसी कारण वश एक को ज्यादा लाड करने लगती है ,तो आप सोचिये की जब समाज के कई वर्ग बनाकर अगर आप एक के हित का सदैव हनन कर वर्गों को सुविधाए देते रहेंगे तो समाज में और अंततः देश में कहा से शांति स्थापित रहेगी ???
आज सामान्य वर्गीय लोगो का असंतोष चरम पर है । हाड़तोड़ मेहनत कर बेरोजगारी का तमाचा पुरस्कार के रूप में पा रहा ये वर्ग ज्यादा दिन अब ये तानशाही नही बर्दाश्त कर सकेगा ।आज आन्दोलन भ्रस्टाचार मिटाने को हो रहा है कल आरक्षण मिटने को होकर रहेगा ।वो तो कहिये की गाँधी की परंपरा हर भारतीय में जीवित है और हम लोकतंत्र का सम्मान करते है नही तो भारत को भी सीरिया और मिस्त्र में बदलने से कोई रोक नही सकता था ।आज आंबेडकर ,मायावती और नेहरु की मुर्तिया तोड़ी जा रही है।कल इन नेताओ को तोडा जाएगा ।ये नेता कहते है की मुर्तिया तोड़ कुछ लोग माहौल बिगड़ने की कोसिस कर रहे है ।मै कहता हु की माहौल तो तभी बिगड़ गया था जब आपने जबरन जनता की सहमती के ये मुर्तिया लगवाई थी ।एक सच्चे नेता की मुर्तिया लगवाने की जरूरत नही होती उसकी प्रतिमा तो लोगो के दिलो में लगी होती है ।जाकर देख आइये अटल बिहारी जी ने कही अपनी प्रतिमा लगवाई है ,की वल्लभ भाई पटेल जी कही अपने पार्क बनवाए है और 12 मुर्तिया लगवाई हो !नही न !पर जाकर लीजिये आज देश का हर बच्चा इनको जानता है ।
याद रखना ऐ भांड राजनेताओ परशुराम सामान्य वर्ग से ही थे और होंगे ।।
जय हिंद ।।
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