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14 Aug 2012

Download Links For Best Patriortic Songs On Independence Day

12 Aug 2012

Master These Universal Keyboard Shortcuts For Text Editing


Master These Universal Keyboard Shortcuts For Text Editing


text editing keyboard shortcutsAfter months of practicing, you have finally boosted your typing speed above that of a snail. You have finally got the hang of not looking at the keyboard for each character. You are no longer “hunting and pecking” to find the keys you need. Good, these are important steps in your journey towards becoming a computer master. However, there is much more to learn, and I am here to show you a way to speed up your typing efficiency by a huge margin.
One thing that slows people down while writing in any application is taking their hands off the keyboard and navigating around the screen with their mouse. There is a better way! There are lots of keyboard shortcuts designed to help you keep your hands on the keyboard and the words flowing. If you learn these shortcuts, you will be able to focus more on writing and less on navigating with your mouse.

Selecting Text

One of the most useful things you can do with text editing keyboard shortcuts is selecting bits of text. It speeds things along a great deal when writing.
text editing keyboard shortcuts
Select one character at a time. – Shift+Left or Right Arrow
Select one line at a time. – Shift+Up or Down Arrow Keys
Select one word with each arrow press. – Shift+Ctrl+Left or Right Arrow
Select current paragraph. – Shift+Ctrl+Up or Down Arrow
Select text between the cursor and the end of the current line. – Shift+Home
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Select text between the cursor and the end of the current line. – Shift+End
Select all text. – Ctrl+A

Editing Text

Once you have all those text bits selected, you need to do something with them. That is where these handy editing bits come into play.
keyboard text editing keys
Copy selected text. – Ctrl+C or Ctrl+Insert
Cut selected text. – Ctrl+X or Shift+Delete
Paste text at the cursor. – Ctrl+V or Shift+Insert
Undo last action. – Ctrl+Z
Redo last action. – Ctrl+Y

Formatting Text

Another useful thing you can do with keyboard shortcuts is format your text. You can make ititalicizedbold and more with just a couple of buttons on the keyboard.
keyboard text editing keys
Make text bold. – Ctrl+B
Make text italicized. – Ctrl+I
Underline selected text. – Ctrl+U

Moving the Cursor

You can move your cursor all around your text document without ever placing your hands on the mouse. This allows you to keep your hands on the keyboard and the productivity flowing.
keyboard text editing keys
Move to beginning of current line. – Home
Move to end of current line. – End
Move to top of text entry field. – Ctrl+Home
Move to bottom of the text entry field. – Ctrl+End
Move up one frame. – Page Up
Move down one frame. – Page Down
Move to beginning of paragraph. – Ctrl+Up Arrow
Move to end of paragraph. – Ctrl+Down Arrow

Working With Whole Words

Deleting text one letter at a time is not the quickest way to do the job. If you need to delete and mess with full words, these keyboard shortcuts are just what you need.
text editing keyboard shortcuts
Move to start of previous word. – Ctrl+Left Arrow
Move to start of next word. – Ctrl+Right Arrow
Delete previous word. – Ctrl+Backspace
Delete next word – Ctrl+Delete

Conclusion

With these keyboard shortcuts, you will be able to increase your writing efficiency substantially. Think of all the time you will save not switching over from your keyboard to your mouse constantly.
For Mac users, most of these shortcuts will work if you just swap CTRL with Command (Cmd).
Are there any text editing keyboard shortcuts we missed? Let us know in the comments!

8 Aug 2012

No electricity,No employment,No Bread,Take Mobiles:UPA FUNDA


 केंद्र बीपीएल परिवारों को मुफ्त फोन देने पर विचार कर रही ।

रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि सरकार को मुफ्त सेल फोन योजना के साथ आगे जाने के लिए उत्सुक नहीं है.

क्या 2014 के आम चुनावों के के आगे यूपीए सरकार द्वारा एक सर्वेक्षण नौटंकी के रूप में कहा जा सकता है, सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे के हर परिवार के लिए एक मोबाइल फोन देने पर विचार कर रही है.

रिपोर्टों के अनुसार, यूपीए सरकार के लिए हर हाथ में मोबाइल 'नामक योजना के तहत 7,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है.

योजना के लिए स्वतंत्रता दिवस पर इस वर्ष कुछ लाख बीपीएल परिवारों को लाभ होगा प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा होने की उम्मीद है. खबरों में कहा गया है कि गरीबी रेखा से नीचे छह लाख से अधिक परिवारों के साथ 200 मुफ्त स्थानीय talktime पहले फोन दिया जाएगा.

यह सीखा था कि पीएमओ योजना आयोग और दूरसंचार मंत्रालय के साथ योजना को आकार देने में शामिल ह

के रूप में भी कदम यूपीए की बोली करने के लिए मतदाताओं को लुभाने के रूप में माना जा रहा है, यह निर्णय सरकार करोड़ों के हजारों है कि विपक्ष से विमान भेदी गोलाबारी ट्रिगर हो सकता है खर्च कर सकते हैं.

3 Aug 2012

Anna's Political Stand Gives Congress Smiles


जंतर मंतर पर टीम अन्ना ने अनशन खत्म करने की अचानक घोषणा कर कइयों को मुस्कराने का मौका दे दिया। कल तक कह रहे थे जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, अनशन खत्म नहीं होगा। अच्छा किया अनशन खत्म कर दिया। हम जानते थे और वे भी कि मांगें पूरी होने वाली नहीं, सरकार हिलने वाली नहीं। और हिली भी नहीं। आन्दोलन का समर्थन करने वाले भी यही चाहते थे कि टीम अन्ना अनशन समाप्त कर आगे की लड़ाई की तैयारी करे। भूखे रह कर जान देने से कुछ नहीं मिलेगा। लेकिन टीम अन्ना ने अनशन तोड़ने की जो वजह बताई और जंतर मंतर पर जो कुछ ऐलान किया, उसने सरकार को मुस्कराने का मौका दे दिया। कहते फिर रहे हैं - देखा, हम तो पहले से कह रहे थे कि अन्ना का आंदोलन राजनीतिक है।

सरकार के मुस्कराने की तीन वजहें हैं। पहली वजह तात्कालिक है कि अनशन खत्म हुआ और तत्काल राहत मिल गई। लेकिन मुस्कराहट की असली दो वजहें कुछ और हैं। पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने की टीम अन्ना की घोषणा से कई कांग्रेसियों के चेहरे खिल गए। उन्हें पता है कि भूखे रहने में वे भले ही टीम अन्ना को हरा नहीं सकते पर चुनावी दंगल में आसानी से पटकनी दे देंगे। टीम अन्ना के पास एक ही हथियार है – भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम का जबकि कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के पास चुनावी हथियारों की कमी नहीं है- जात पात और मजहब वाला पारंपरिक वोट बैंक, पैसा (काला सफेद दोनो), राजनीतिक रुप से ट्रेंड कार्यकर्ताओं से भरा-पूरा संगठन और घाघ राजनेताओं की जमात। एक नई नवेली पार्टी के लिए इस चक्रव्यूह को तोड़ना आसान नहीं होगा।

कांग्रेसी मुस्करा रहे हैं और इसे अपनी जीत मान रहे हैं।कहते फिर रहे हैं- “देखा, हम तो पहले से कह रहे थे कि टीम अन्ना का आन्दोलन राजनीतिक है।“ कांग्रेस के मुस्कराने की एक वजह और है। पार्टी के कुछ नेताओं को लगता है कि अगर टीम अन्ना ने कोई पार्टी बनाई और चुनाव लड़ा तो इसका उतना ज्यादा नुकसान नहीं होगा जितना अभी आन्दोलन की वजह से हो रहा है।

आन्दोलन ने लोगों के मन में ये बात डालने में कामयाबी तो हासिल की है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून के रास्ते में कांग्रेस ही एक मात्र रोड़ा है। यानी टीम अन्ना जनता को ये कन्विंस करने में लगभग कामयाब हो गई थी कि लड़ाई के एक तरफ भ्रष्टाचार का विरोध करने वाली जनता है तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली सरकार जिसकी मुखिया कांग्रेस है। ऐसे में, हर चुनाव में भ्रष्टाचार विरोधी वोटरों का गुस्सा कांग्रेस के खिलाफ उतरता था। और फायदा कांग्रेस के निकटतम प्रतिद्वन्द्वी को होता था। यानी अब तक अन्ना के आंदोलन का फायदा कांग्रेस विरोधी राजनीतिक दलों को हो रहा था।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब कांग्रेस विरोधी वोट बटेंगे। कांग्रेस विरोधी जो वोट अब तक बीजेपी, लेफ्ट या क्षेत्रीय दल ले जाया करते थे उनमें एक नया हिस्सेदार और आ जाएगा- अन्ना जी की पार्टी के रूप में।

ये तो टीम अन्ना को भी पता है कि हमारे देश में केवल फेसबुक और ट्विटर की मदद से चुनाव लड़ा और जीता नहीं जा सकता है। खुद अरविंद केजरीवाल ने जंतर मंतर पर कहा कि यहां वोट खरीदे जाते हैं। ऐसे में 545 संसदीय क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के लिए अरबों रुपए कहां से आएंगे। अगर चुनाव खर्च उठाने की जिम्मेदारी उम्मीदवारों पर छोड़ देंगे तो या तो केवल अमीर उम्मीदवारों का ही चयन हो पाएगा या फिर पिछले दरवाजे से भ्रष्टाचार का प्रवेश होगा। आप भले ही वोट न खरीदें, जरुरी खर्च तो करने ही पड़ेंगे।

कांग्रेसी नेताओं को पता है कि उनकी पार्टी या सरकार टीम अन्ना को जंतर मंतर या रामलीला मैदान में टक्कर नहीं दे सकती लेकिन अगर मुकाबला सतारा, भागलपुर या बेलारी में हो तो करारा जवाब दिया जा सकता है, क्योंकि वहां केवल नारे नहीं चलेंगे, सोशल मीडिया नहीं चलेगा। वहां पैसा चलेगा, जात-धर्म का कार्ड चलेगा। ऐसे में, बेचारी टीम अन्ना कहां तक चल पाएगी। अगर राजनीतिक दल बनाने से पहले 1974 के जे पी आन्दोलन की तरह देश भर में लहर फैल गई होती तो आसान होता। लेकिन जय प्रकाश नारायण के आंदोलन के करीब पहुंचने से पहले पार्टी बनाने और चुनाव लड़ने की घोषणा इस आंदोलन की अकाल मौत की तरह है।

सुनने में अच्छा लगता है पर हकीकत यह है कि इस देश में केवल मुद्दों के बल पर चुनाव लड़े और जीते नहीं जा सकते। अगर ऐसा होता तो उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को भारी बहुमत नहीं मिलता, गुजरात में बार बार मोदी चुनाव नहीं जीतते और उत्तराखंड में अन्ना के मनमाफिक लोकायुक्त कानून बनाने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री बी सी खंडूरी चुनाव नहीं हारते।

कहीं टीम अन्ना कांग्रेस और सरकार के बिछाए जाल में तो नहीं फंस गई।


Google Goggles Vs Google Glasses

Google Glasses:


Google Glass detail.jpgProject Glass is a research and development program by Google to develop an augmented reality head-mounted display (HMD). The intended purpose of Project Glass products would be the hands free displaying of information currently available to most smartphone users, and allowing for interaction with the Internet via natural language voice commands, in a manner which has been compared to the iPhone feature Siri. The functionality and physical appearance (minimalist design of the aluminium strip with 2 nose pads) has been compared to Steve Mann's EyeTap,which was also referred to as "Glass" ("EyeTap Digital Eye Glass", i.e. use of the word "Glass" in singular rather than plural form "Glasses").The operating system software used in the glass will be Google's Android.Project Glass is part of the Google X Lab at the company, which has worked on other futuristic technologies, such as a self-driving car. The project was announced on Google+ by Babak Parviz, an electrical engineer who has also worked on putting displays into contact lenses; Steve Lee, a project manager and "geolocation specialist"; and Sebastian Thrun, who developed Udacity as well as worked on the self-driving car project.Google has patented the design of Project Glass.


Google Goggles:

Google Goggles is a downloadable image recognition application created by Google Inc. which can be currently found on the Mobile Apps page of Google Mobile. It is used for searches based on pictures taken by handheld devices. For example, taking a picture of a famous landmark would search for information about it, or taking a picture of a product's barcode will search for information on the product.

Google Goggles was developed for use on Google's Android operating systems for mobile devices. While initially only available in a beta version for Android phones, Google announced its plans to enable the software to run on other platforms, notably iPhone and BlackBerry devices. Google has not discussed a non-handheld format. On 5 October 2010, Google announced availability of Google Goggles for iPhone and iPad devices, that run iOS 4.0.

UsesCurrently the system can identify various labels or landmarks, allowing users to learn about such items without needing a text-based search. The system can identify products barcodes or labels that allow users to search for similar products and prices, and save codes for future reference, similar to the failed CueCat of the late '90s, but with more functionality. The system will also recognize printed text and use optical character recognition (OCR) to produce a text snippet, and in some cases even translate the snippet into another language.




1 Aug 2012

Power,Freedom and Change, Flows Through The barrel Of Gun

भाइयो और बहनों जो भी अन्ना जी के साथ हैं उनको मैं कुछ नहीं कह रहा हूँ....वो अपना काम करे ,..... मैं अपना काम कर रहा हूँ.........मैं किसी का हौसला नहीं तोड़ रहा..बल्कि मैं अपने जज्बात बयाँ कर रहा हूँ......किन्तु मेरी एक बात का जवाब देना......भूखे रहने से कभी क्रांति आई हैं क्या ?....आज तक की सभी क्रांतियो का इतिहास उठाकर देखो.....क्रांत ि खून मांगती हैं.......भूखे रहने से क्रांति नहीं आती....सिर्फ बेहोशी आती हैं....और साथ में हेमोग्लोबिन में कमी....और साथ ही..किडनी फेलियर और..कोम्मा की स्थिति आती हैं....और बाद में राम नाम सत्य हो जाता हैं..........गं गानदी के लिए के एक संन्यासी ने..अनशन किया..नतीजा ..आपके सामने हैं...वो संत कोम्मा में चले गए और फिर दुनिया ही छोड़ गए.......लेकिन किसी के कान पे जू तक न रेंगी....नतीजा वही धाक के तीन पात............ ............इसल िए मैं तो अन्ना के साथ नहीं.....उठो जागो.....लोहा गरम हैं..मार दो हथोडा.. .और..फोड़ दो सर सभी.....गद्दारों ... का....वरना..... बाद में पछताओगे.. अभी नहीं तो कभी नहीं.....! अगर अनशन से ..क्रांति आती और.....हक मिलता तो..सुभाष बॉस कभी नहीं कहते'' तुम मुझे खून दो .मैं तुम्हे आजादी दूंगा....''.... ....और भगत सिंह कभी नहीं कहते की .....बहरी सरकार कोसुनाने के लिए धमाको की जरुरत होती हैं.....अगर यही सत्य होता तो..श्री कृष्ण अर्जुन को महाभारत में अनशन के लिए कहते.....युद्ध के लिए नहीं.........गा ँधी के समर्थक...जाओ..औ र श्री मद भगवत गीताके कर्मयोग का अध्याय पढो...तुम्हारी मानसिक उन्नति रुकी हुई हैं.....पहले गीता को समझो फिर आकर यहाँ बहस करना........हक मांगने से नहीं मिलता उसको छिनना पड़ता हैं............ ....जाओ और तोड़ तो उन गद्दारों के...दांत..कि वो काबिलन रहे....मुंह में निवाला चबाने के.........और.. .....करो प्रहार उनके पिछवाड़े पे.......कि...व ो...उस ३५ लाख वाले टॉयलेट पे जाकर ..टट्टी करने के काबिल न बचे......माननीय केजरीवाल जी आप से एक सामन्य नागरिक का अनुरोध है की आपअपना अनशन तोड़ दे क्यूकी.१ ये सत्यता है की कांग्रेसी आप को मार देना चाहते है२ भाजपा और संघ आप को अपराधी नरसंहारक अमानवीय लगते हैं जिससेआप का कुछ लेना देना नहीं है..यदि कुछ देना है तो इन अपराधियों को गलिया देना है..स्वाभाविक है आप इनकी बात नहीं सुनेंगे.३ आप के परम मित्र मौलाना बुखारी जो की एक स्वघोषित आई एस आई एजेंट भी है,वो भी नहीं आयेंगे क्यूकी वो जानते हैं की गाँधी ने देश में सेकुलर(हिन्दू विरोधी ) देशभक्तों की एक फ़ौज खड़ी कर दी है,आप के साथ कुछ बुरा हुआ तो, उसकेजूते चाटने के लिए नयी देशभक्त फ़ौज लाइन में खड़ी हैअंत में मैं संघ की विचारधारा का एक व्यक्ति (आप के हिसाब से अमानवीय आतंकवादी) मैं आप से अनुरोध करता हूँ,क्यूकी आप एक हिन्दू हैं (हाँ शायद सेकुलरिज्म का वायरस आ गया है आप में ) ,की अनशन ख़तम करे और सेकुलरिज्म का चोला उतारे एवं गद्दारों का साथ नदे और देशहित में अपने प्राण बचाएनोट..-- यह पोस्ट सिर्फ गरम दल वालोको समर्पित हैं.......टकलू गाँधी..और नरम दल के समर्थक यहाँ आकर अपना भोपू न बजाये.......!.. याद रखो...बल्ली हमेशा बकरे की दी जाती हैं शेर की नहीं..!........ .....यह पोस्ट पढ़कर कुछ लोग मुझे गालिया भी देंगे....उनको मैं कुछ नहीं कहूँगा...निकाले अपनी भड़ास....अपना अपना नजरिया हैं.......लेकिन एक बात वो भी जानले मैं यह सब युही नहीं कह रहा हूँ......बल्कि. ...रामलीला मैदान में लठ मैंने भी खाए..हैं.....बा बा के समर्थन में...........ल ेकिन कोई हल न निकला....तब मेरी सोच बदली.....!




30 Jul 2012

India Can Never Be Paeceful Unless Caste and Religion are Reservation Criterias

देश समाज से बनता है,,समाज लोगो से ,समाज की ईकाई हुआ एक व्यक्ति ।मनुष्य चाहे जो कोई भी हो ,उसके अन्दर कुछ बाते समान  है -प्रेम ,इर्ष्या ,करुणा  आदि ।ये मनुष्य की कुछ मूलभूत प्रवृतिया है ।समाज के प्रशाषक  वर्ग का कर्त्तव्य है समाज में सौहार्द बना कर रखना ताकि देश में भी सौहार्द और अखंडता का परिवेश रहे ।ऐसा करने के लिए अतिआवश्यक  है की सभी लोगो को समान अवसर मिले -चाहे वो जीवनयापन के हो या उन्नति के ।एक शांतिपूर्ण  समाज ही एक अखंड और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण कर सकता है ।  समाज और देश के लिए ये एक आदर्श नियम है ।

आइये देखते आज भारत में क्या हो रहा है ?आज भारत कई टुकडो में बट चुका  है ,बाटा  है  आज  के  सत्ता लोलुप इन  नेताओ ने । कभी धर्म  के नाम पर तो कभी जाति  के नाम पर,तो कभी भाषा के नाम पर ।आज इन्होने आरक्षण की इसी गन्दी राजनीति शुरू कर दी है की लोग वर्गों में बात  है ,हर रोज़ एक नया गुट  रेल लाइन पर जाके बैठ जाता है ।मै  कहता हु दोष इन लोगो नही इन भेड़िया  रूपी राजनेताओ का है जो समाज को भेड़ समझ  इसे अपनी बातो में बहका ले जाते है और सत्ता मिलने पर रोज एक भेड़ खाने का कानून बना लेते है ।
एक सामान्य स्थिति आपको समझता हु की आपने स्वयं देखा होगा की एक ही माँ के दो बेटो में मनमुटाव तब हो जाता है जब जब माँ किसी कारण वश एक को ज्यादा लाड  करने लगती है ,तो आप सोचिये की जब समाज के कई वर्ग बनाकर अगर आप एक के हित का सदैव हनन कर  वर्गों को सुविधाए  देते रहेंगे तो समाज में और अंततः देश में  कहा  से शांति स्थापित रहेगी ???

आज सामान्य वर्गीय लोगो का असंतोष चरम पर है । हाड़तोड़ मेहनत कर बेरोजगारी का तमाचा पुरस्कार के रूप में पा रहा ये वर्ग ज्यादा दिन अब ये तानशाही नही बर्दाश्त कर सकेगा ।आज आन्दोलन भ्रस्टाचार मिटाने को  हो रहा है कल आरक्षण मिटने को होकर रहेगा ।वो तो कहिये की गाँधी की परंपरा हर भारतीय में जीवित है और हम लोकतंत्र का सम्मान करते है नही तो भारत को भी सीरिया और मिस्त्र में बदलने से कोई रोक नही सकता  था ।आज आंबेडकर ,मायावती और नेहरु की मुर्तिया तोड़ी जा रही है।कल इन नेताओ को तोडा जाएगा ।ये नेता कहते है की मुर्तिया तोड़ कुछ लोग माहौल बिगड़ने की कोसिस कर रहे है ।मै  कहता हु की माहौल तो तभी बिगड़ गया था जब आपने जबरन  जनता की सहमती के ये मुर्तिया लगवाई थी ।एक सच्चे नेता की मुर्तिया लगवाने की जरूरत नही होती उसकी प्रतिमा तो लोगो के दिलो में लगी होती है ।जाकर देख आइये अटल बिहारी  जी ने कही  अपनी प्रतिमा लगवाई है ,की वल्लभ भाई पटेल जी कही अपने पार्क बनवाए है और 12 मुर्तिया लगवाई हो !नही न !पर जाकर  लीजिये आज देश का हर बच्चा इनको जानता  है ।

याद रखना ऐ भांड राजनेताओ परशुराम सामान्य वर्ग से ही थे और  होंगे  ।।

जय हिंद ।।

24 Jul 2012

JOIN RTI ANONYMOUS:FIGHT CORRUPTION

RTI अधिनियम 2004 के बारे    अपने पिछले लेख में बता दिया था । इस अधिनियम में यु तो गोपनीयता का प्रावधान है परन्तु  आज भ्रष्टाचार यु फ़ैल गया है की सरकारी अधिकारी RTI कार्यकर्ताओ के नाम गोपनीय न रखके सम्बंधित भ्रष्ट लोगो को बता  है ।इसका प्रमाण है 28 RTI  कार्यकर्ताओ की बर्बरता पूर्वक की गयी हत्या ।इनका    था के  लोगो को एक भ्रस्ताचार मुक्त व् भयमुक्त समाज और देश देने के लिए संघर्ष कर रहे थे ,अपने लिए और आप सब लोगो के लिए ।

पर ये जड़ देश न कभी   के लिए एकजुट लड़ा है न कभी लड़ेगा ।सरकार  से सुरक्षा की उम्मीद तो करना ही ऐसे है जैसे 1857 में देश की  की उम्मीद करना । क्युकी इस सरकार  के 54 मंत्रियो में से 14 तो  ही भ्रस्टाचार में खुद ही  लिप्त है ।

ऐसी विकट  के समाधान के लिए एक संस्था है जो पूर्णतया आपकी RTI गोपनीय रखती है ।इस संस्था का नाम RTI (ANONYMOUS ) है ।ये संस्था एक ऑनलाइन संस्था है जो आप तक हर समय और हर जगह मौजूद है , कही  भी इन्टरनेट की  व्यवस्था है ।इसकी कार्यप्रणाली  इस प्रकार है -

How Does RTI Anonymous Work

आइये आगे बढिए और इन भ्रष्टो में RTI का भय  करिये इनकी करतूतों को RTI के द्वारा बेनकाब करके ।अधिक जानकारी और RTI (ANONYMOUS ) के साथ जुड़ने के लिए :http://getup4change.org/rti/how-does-rti-anonymous-work/

UPA To Spend 52 Crores On Rahul Sonia Security


नई दिल्ली: एक समय में जब यूपीए शीर्ष जूझती  अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए  मितव्ययिता के उपाय   व उपदेश दे रही थी और   आज सरकार वीवीआईपी सुरक्षा पर 51 करोड़ रुपये की  राशि खर्च करने पर विचार कर रही है.।

दिल्ली स्थित अखबार के अनुसार, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के लिए प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी जैसे अन्य अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए इस तरह के हमलों पूर्वक्रय से प्राप्त करने के काफिलों में जवाबी हमला वाहनों को प्रतिष्ठित करने हेतु  अनुमोदन की मांग की है.

एसपीजी प्रधानमंत्री और उसके तत्काल परिवार के सदस्यों, और किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री को या उसके तत्काल परिवार के सदस्यों के लिए आसन्न सुरक्षा प्रदान करता है. इस संबंध में, एसपीजी गार्ड राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी, उनके पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी वढेरा के लिए भी जिम्मेदार है ।

 रिपोर्ट में कहा गया है,एसपीजी की  योजना में  10 रक्षा शेरपा 2 के साथ जवाबी हमला वाहनों की खरीद भी शामिल है 6 रक्षा शेरपा 2 रेनॉल्ट ट्रक रक्षा से त्वरित प्रतिक्रिया टीम वाहनों है कि लगभग 51 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।,अनुकूलन के उच्च डिग्री, रेनॉल्ट शेरपा पर विचार किया गया है, जो खरीद का एक कैबिनेट सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार समिति की मंजूरी की जरूरत है।

यह भी पता चला है कि एसपीजी का प्रस्ताव आतंक वीवीआईपी आगे 2014 के लोकसभा चुनाव के काफिलों पर हमले के खतरे पर बढ़ती चिंताओं के बीच आता है.।

  प्रश्न   है की    UPA   सरकार से सभी लोग ट्रस्ट है पर हाल में जब भारत के आधा दर्जन राज्य सूखे की    है तो  जेड + श्रेदी की सुरक्षा प्राप्त सोनिया और राहुल को 52  और  की   आफत आ पड़ी है ??इन ;दो लोगो की जान सूखे से 6 प्रदेशो में मर रहे किसानो और आम नागरिको से क्या ज्यादा  मूल्यवान है??कांग्रेस का  न कभी आम आदमी के साथ न था ,न ही है और न कभी होगा ।नेहरु को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश का बटवारा करने वाले ,आदमी की आर्थिक स्थिति मजबूत  होने पर ही सदस्यता देने वाली कांग्रेस कभी आम आदमी का हित नही क्र सकती ।और बताते चलू इनका जिन्दा रहना जरूरी इसलिए है ताकि ये देश को  सके ,मुर्ख जनता  को अपने झूठे वादों  से  रिझाकर सत्ता पाकर उनका खून खून चूस सके और अपने विरोधियो को बिना किसी हस्तछेप के  शमशान पहुचा सके ।

जय हिंद ।।

23 Jul 2012

Nag Panchami :Significance


 

nagpanchami festivalश्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म के लोग इस दिन नाग को देवता मानकर उनकी पूजा करते हैं। इस बार यह पर्व 23 जुलाई, सोमवार को है। सोमवार चूंकि भगवान शिव का दिन माना गया है इसलिए इस बार नागपंचमी का महत्व और भी बढ़ गया है।

पुराणों के अनुसार इस दिन नाग के दर्शन व पूजन का विशेष फल मिलता है। जो भी इस दिन नाग की पूजा करता है उसे कभी सांप का भय नहीं होता और न ही उसके परिवार में किसी को नागों द्वारा काटे जाने का भय सताता है। नागपंचमी का पर्व मनाए जाने के पीछे एक कथा भी प्रचलित है जो इस प्रकार है-

किसी नगर में एक किसान परिवार रहता था। एक दिन वह किसान अपने खेत में हल चलाने गया। हल जोतते समय नागिन के बच्चे हल से कुचल कर मर गए। नागिन अपने बच्चों को मरा देखकर दु:खी हुई। उसने क्रोध में आकर किसान, उसकी पत्नी और लड़कों को डस लिया। जब वह किसान की कन्या को डसने गई तब उसने देखा किसान की कन्या दूध का कटोरा रखकर नागपंचमी का व्रत कर रही है।

यह देख नागिन प्रसन्न हो गई। उसने कन्या से वर मांगने को कहा। किसान कन्या ने अपने माता-पिता और भाइयों को जीवित करने का वर मांगा। नागिन ने प्रसन्न होकर किसान परिवार को जीवित कर दिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि श्रावण शुक्ल पंचमी को नागदेवता का पूजन करने से किसी प्रकार का कष्ट और भय नहीं रहता।

22 Jul 2012

Famous Poitician's Quotes



Politics, it seems to me, for years, or all too long, has been concerned with right or left instead of right or wrong.  ~Richard Armour


Politicians and diapers should be changed frequently and all for the same reason.  ~José Maria de Eça de Queiroz, translated from Portuguese


Hell, I never vote for anybody, I always vote against.  ~W.C. Fields


We live in a world in which politics has replaced philosophy.  ~Martin L. Gross, A Call for Revolution, 1993


There are many men of principle in both parties in America, but there is no party of principle.  ~Alexis de Tocqueville


We'd all like to vote for the best man, but he's never a candidate.  ~Frank McKinney "Kin" Hubbard


All of us who are concerned for peace and triumph of reason and justice must be keenly aware how small an influence reason and honest good will exert upon events in the political field.  ~Albert Einstein


Under democracy one party always devotes its chief energies to trying to prove that the other party is unfit to rule - and both commonly succeed, and are right.  ~H.L. Mencken, 1956


What is conservatism?  Is it not the adherence to the old and tried against the new and untried?  ~Abraham Lincoln


I think it's about time we voted for senators with breasts.  After all, we've been voting for boobs long enough.  ~Clarie Sargent, Arizona senatorial candidate


A liberal is a man or a woman or a child who looks forward to a better day, a more tranquil night, and a bright, infinite future.  ~Leonard Bernstein, The New York Times, 30 October 1988


Take our politicians:  they're a bunch of yo-yos.  The presidency is now a cross between a popularity contest and a high school debate, with an encyclopedia of cliches the first prize.  ~Saul Bellow


In order to become the master, the politician poses as the servant.  ~Charles de Gaulle


Those who are too smart to engage in politics are punished by being governed by those who are dumber.  ~Plato


Politicians are the same all over. They promise to build a bridge even where there is no river. ~Nikita Khrushchev


Liberalism is trust of the people tempered by prudence.  Conservatism is distrust of the people tempered by fear.  ~William E. Gladstone, 1866


When I was a boy I was told that anybody could become President; I'm beginning to believe it.  ~Clarence Darrow


George Washington is the only president who didn't blame the previous administration for his troubles.  ~Author Unknown


Truth is not determined by majority vote.  ~Doug Gwyn


An election is coming.  Universal peace is declared, and the foxes have a sincere interest in prolonging the lives of the poultry.  ~George Eliot


Politics is the art of looking for trouble, finding it whether it exists or not, diagnosing it incorrectly, and applying the wrong remedy.  ~Ernest Benn


We have, I fear, confused power with greatness.  ~Stewart Udall


The modern conservative is engaged in one of man's oldest exercises in moral philosophy; that is, the search for a superior moral justification for selfishness.  ~John Kenneth Galbraith


A conservative is a man with two perfectly good legs who, however, has never learned how to walk forward.  ~Franklin D. Roosevelt, radio speech, 26 October 1939


Politicians are people who, when they see light at the end of the tunnel, go out and buy some more tunnel.  ~John Quinton

Source:http://mightyarticles.blogspot.com

JayLalitha Ji gives Hindus Subsidy for Pilgrimage:Dat's Democracy


तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने आज हिंदुओं के तीर्थ चीन और नेपाल में Mukthinath मंदिर में मानसरोवर मंदिर में करने के लिए, क्रमशः सक्षम 40,000 रुपये और 10,000 रुपये की सब्सिडी की घोषणा की. राज्य विधानसभा में नियम 110 के तहत एक वक्तव्य बना रही है, उसने कहा सब्सिडी से राज्य के 500 तीर्थयात्रियों के लिए दिया होगा - मानसरोवर और Mukthinath मंदिरों के लिए 250 प्रत्येक विदेश मंत्रालय द्वारा चुना. उन्होंने कहा कि एक लाख रुपये की कुल लागत की, सरकार ने उन पर जाकर Mukthinath मंदिर, कुल लागत 25,000 रुपये आता है जिसके लिए के लिए सब्सिडी के रूप में मानसरोवर और 10,000 रुपये के लिए जा रहा तीर्थयात्रियों के लिए सब्सिडी के रूप में 40,000 रुपये देना होगा.

उन्होंने कहा कि हिंदुओं के हजारों हर साल इन धार्मिक स्थलों के लिए तीर्थ का कार्य. लेकिन आर्थिक रूप से गरीब पृष्ठभूमि से उन लोगों के लिए, यह केवल एक सपना बना रहा.

, सुश्री जयललिता ने कहा कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए, यह करने के लिए यरूशलेम को तीर्थयात्रा करने के लिए ईसाइयों के लिए दिया जा रहा है एक की तर्ज पर हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया गया|

मन हर्षित है की कोई तो नेता है जो वोट बैंक की नजर से जनता को न देखकर लोकहित की नजर से देखता है ।लोकतंत्र कही तो जीवित है ।

Major Corruption Cases In India:Govt and Prime minister wise

 भ्रष्टाचार भारत क्यों  नही  ख़त्म  हो सकता ?आइये  डालते  है एक सरसरी निगाह  सभी  पहलुओ पर .आप  सब को ज्ञात  होगा की भारत  ही  मात्र  एक ऐसा  देश हैं जहा  आप  किसी भी एक विभाग को आप  नही  कह सकते  की विभाग  में भ्रष्टाचार नही  है, न्यायपालिका  से लेकर  संसद हो, चाहे राष्ट्रपति से लेकर चपरासी  हो, सब भ्रष्टाचार में यू से लिपट है जैसे पानी और कीचड़ .और  ऐसा बिलकुल  नही  है की किसी एक सरकार या पार्टी के कार्यकाल  में  सिर्फ भ्रष्टाचार  बढ़ा  है, कुर्सी मिलने पर पाँव  अपने  पसारे  है.।वो कहते है न एक प्रसिद्द कहावत :
                                        "कद्दू कटेगा सबमे बटेगा "।।
तो कहना बिलकुल भी गलत नही है की भारत की जनता यह कद्दू है और उसको बारी बारी से काट काटकर  खाने वाली ये सरकारे और राजनीतिज्ञ है ।



सबसे पहले नजर करते है भारत   इतिहास में हुए प्रमुख घोटालो पर :
  1. 1950 से 1970:प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु :मुंधरा काण्ड  साथ ही साथ सी.राजगोपालाचारी द्वारा सुझाया License Raj ने आर्थिक अस्थिरता ,आपराधिक संस्थाओ की  भ्रष्टाचार  में संलिप्तता और उद्योगों में  भ्रष्टाचार बढ़ावा दिया ।(सूत्र :वोहरा कमिटी रिपोर्ट ,एन .एन वोहरा )
  2. 1970-1984:इंदिरा गाँधी ने अपने निष्कंटक एकल सशंकल और "गाँधी " पदवी का  आर्थिक  में बहुतया उपयोग किया और जब जय प्रकाश नारायण ने अपने समाचार पत्र के  माध्यम से ये बात लोगो  पहुचाई  तो असंतोष को  के लिए किया ।
  3. 1984-1991:प्रधानमंत्री  राजीव गाँधी :बोफोर्स घोटाला :मन गया है की राजीव गाँधी और  परिजनों ने 
  4. स्वीडन की कम्पनी  से होवित्जर तोपे  के बदले मोटी रकम वसूली । 
  5. 1991-1998:प्रधानमंत्री पी .वी .नर्शिम्हा राव :हर्षद मेहता कांड का शेयर  घोटाला
  6. 1998-2004:प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी :यु तो संप्रग सरकार  में  कोई बड़ा घोटाला नही सामने आया सिवाय अब्दुल करीम तेलगी का फर्जी स्टाम्प  घोटाला काण्ड
  7. 2004-2012:प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह(भारत के सबसे ज्ञान्विद पर साथ ही सस्थ सबसे प्रभावहीन मुखिया ):इस सरकार के  भारतीय इतिहास में हुए सबसे बड़े घोटाले इस भावी UPA गठबंधन के नाम है ।कुछ प्रमुख नाम :2G स्पेक्ट्रम काण्ड( अभियुक्त :ए.राजा) ,आदर्श सोसाइटी घोटाला ,कोयला खनन घोटाला ,कॉमनवेल्थ 2010 घोटाला ,अवैध बालू खनन काण्ड ,वोट  के लिए नोट काण्ड (इस काण्ड ने भारतीय संसद की गरिमा को धूमिल किया ) आदि ।
ये घोटाले ये है जिन पर कुछ न कुछ  हुई है और  अभियुक्तों को सजा भी हुई है ।अधिक जानकारी के लिए जाये इस लिंक पर जाये:http://www.vidushaka.com/indiacorruption.html,

कृपया इस लेख को  अन्य लोगो तक पहुचने के लिए social नेटवर्क सिम्बल्स जोकि निचे है उनके माध्यम से शेयर करे ।धन्यवाद् ।


20 Jul 2012

Mahabharata :myth or reality



Mahabharata :myth or reality


Mahabharata

It has been debated for long whether the epic story of MAHABHARATA is real or just an imaginary story written by Ved Vyas. To find my answers i did some research and found some astonishing facts.
An excavation was carried out by National Institute of Oceanography under the sea near Gujarat coast to find evidence regarding the existence of an ancient city and civilization prior to Indus valley civilization. After diving deep scientist found a whole new city under the sea that resembled Lord Krishna's Dwaraka described in Mahabharata. Some artifacts were collected and sent for examination and to everyone's astonishment some of these artifacts were 32,000 years old. 


When man around world were wandering in forest, 32,000 years ago we find a city in India with sandstone walls and copper stone streets. As described in Mahabharata, Dwaraka city was submerged under water by Lord Krishna, oceanographers found out that this city was submerged underwater some 9000 years ago the same time when Mahabharata war ended.

The words 'Puraan' and 'Itihas' used by Ved Vyas in Mahabharata, these words were coined by Aryans to specify 'Ancient' and 'Recent' events. Detailed description of events, places and charecters myriad in nature which is too difficult for a person to visualize on own apart from being a real life incident.

Ancient Nuclear Warfare used in Mahabharata:

There is an description of an explosion in Mahabharatha war which gives us insight that ancient Indians knew about Nuclear warfare and even used it. A person when exposed to nuclear radiation has his finger nails and hairs falling out which is described clearly in the texts and secondly Ved Vyas describes that soldiers jump in water after the explosion, which goes with the fact that jumping in water eases the pain by nuclear radiation.


Scientist have found out an ancient city near Rajasthan with radioactive ash dating back 8000-12000 years. Modern analysis show that the ancient city was burned at a temperature greater than 1500 degree centigrade


Francis Taylor states "It's so mid-boggling to imagine that some civilization had nuclear technology before we did. The radioactive ash adds credibility to the ancient Indian records that describe atomic warfare."
J .Oppenheimer the principal developer of atomic bombs stated acknowledeged the impact Vedas had on him while creating atomic bomb, when oppenheimer was first asked whether this was the first nuclear explosion??,he replied "yes ,but in modern times implying that ancient nuclear explosions may have occurred earlier in ancient times"

19 Jul 2012

Who will launch the next big thing Google Apple or Microsoft ???


Who will launch the next big thing Google Apple or Microsoft ???

After the social networking revolution by an Harvard undergrad Mark Zuckerbergthe question again arises who will launch the next big thing ????

For a better understanding let us look at history, back in 1970's computers were costly, huge in size often occupying large spaces and consumed a lot of power as a result they were out of reach to the general public but one man changed it all, when he created the first personal computer that had more computing power than thescientific computers used in the Apollo mission and occupied less space and consumed less power.. and that man unknown to the world then is known today allover asSteve Jobs, the man who created Mac O.SI-PODI-PAD,I-PHONEApple PC....


Then came Bill Gates and Paul Allen in1980's and found their unknown company calledMicrosoft which had an humble beginning but turns out to become the worlds most prestigious company. It developed Windows O.S that is most widely used O.S in the world.

In 1990's two geek's go to Microsoft with their research project known as Internet Search Engine but are ridiculed and sent home.. but undeterred the two geeks's Larry Pageand Sergey Brin continued with their research and developed their own internet search engine known as "GOOGLE" and changed the way whole world looked atinternet. Through Google guys the real power of internet was noticed.

Considering all this we can be optimistic that maybe history would repeat itself and an unknown person with an extra-ordinary idea will launch the next big thing that would change the world. 

Familification of Indian Politics:A danger to National Interest

विरासत की सियासत 

भारतीय राजनीति पर हमेशा से परिवारवाद और भाई-भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं। तर्क ये कि लोकतंत्र में परिवारवाद के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। मिसाल दी जाती है पश्चिमी देशों की। हालांकि इंग्लैंण्ड जैसा लोकतंत्र सदियों से एक शाही परिवार के अंगूठे के नीचे काम करता चला आ रहा है। अब इसे सही मानें या गलत, लेकिन भारतीय राजनीति में परिवारवाद कहीं न कहीं भारतीय समाज की मजबूत परिवार संस्था को ही दर्शाता है। जिन देशों में परिवार संस्थाएं बेहद कमजोर हैं वहां की राजनीति में भी परिवारवाद कम देखने को मिलता है। भारत समेत अधिकांश एशियाई देश भले ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत काम कर रहे हों, लेकिन वहां की राजनीति में परिवारों का खासा दखल है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि इन देशों के समाज में परिवार आज भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जबकि पश्चिमी देशों में परिवार संस्थाएं तेजी से भरभरा रही हैं।


देश के उत्तरी छोर से शुरू करते हुए अगर भारत पर नजर डालें तो- जम्मू कश्मीर की नेशनल काॅन्फ्रेंस में अब्दुल्ला परिवार और पीडीपी में मुफ्ती परिवार, उत्तर प्रदेश की सपा में मुलायम सिंह का परिवार और रालोद में चै. अजीत सिंह का परिवार, पंजाब के अकाली दल में बादल परिवार, हरियाणा के इनेलो में चैटाला परिवार, बिहार के राजद में लालू यादव परिवार, उड़ीसा के बीजद में पटनायक परिवार, महाराष्ट्र की शिव सेना में ठाकरे परिवार, तमिलनाडु में करुणानिधि परिवार, ग्वालियर का सिंधिया परिवार और सबके ऊपर एक राष्ट्रीय परिवार- गांधी परिवार। भारत की राजनीति पूरी तरह परिवारों के गिरफ्त में है। भारतीय राजनीति में परिवार इतने महत्वपूर्ण हो चले हैं कि उनको राजनीति से अलग किया ही नहीं जा सकता। और जिस तरह जनता इन पारिवारिक पार्टियों के सिर पर जीत का सेहरा बांधती आ रही है, उसे देखकर तो यही लगता है कि आम जनमानस को परिवारवाद से कोई खास दिक्कत नहीं है।

वाम दल और भाजपा ऐसी पार्टियां हैं जहां पारिवारिक उत्तराधिकारी देखने को नहीं मिलते। भाजपा के वरिष्ठ नेता अपने बच्चों को सांसद और विधायक के पदों तक तो पहुंचाने में सफल रहे हैं, लेकिन किसी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के बेटे के सीएम-पीएम बनने के उदाहरण नहीं दिखते। भाजपा में संघ का दखल व अनुशासन और वाम दलों में पार्टी की सख्त कार्यप्रणाली व नीतियां इसके पीछे मुख्य कारण हो सकती है। लेकिन कांग्रेस समेत देश की बाकी पार्टियों में परिवारों का खासा बोलबाला है। वैसे भी ये तो इस देश की संस्कृति रही है कि पिता अपने पुत्र को और भाई अपने भाई को सदा से मजबूत बनाता चला आया है। तो अगर राजनीतिक दलों में ऐसा हो रहा है तो उसमें हैरान होने की कोई बात नहीं। भारत के जिन घरों में पिता-पुत्र और भाई-भाई के रिश्तों में दरारें हैं उन घरों को अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता। हमारे यहां खून के रिश्तों को इतना महत्व दिया जाता है कि सर्वोच्च पदों पर पहुंचने के बाद भी रिश्तों को दरकिनार नहीं कर सकते। जिस दिन भारतीय समाज में व्याप्त मजबूत परिवार संस्था कमजोर होगी उस दिन भारतीय राजनीति से भी परिवारवाद खत्म होना शुरू हो जाएगा।

इसमें कोई दो राय नहीं कि लोकतंत्र के लिए परिवारवाद अच्छा नहीं, लेकिन आजादी के 65वें साल में भी लाख हो-हल्ले के बावजूद देश की राजनीति से परिवारवाद नहीं मिट पा रहा है। अगर केंद्रीय सरकार की बात करें तो 65 में से तकरीबन 50 सालों तक एक मात्र नेहरू-गांधी परिवार की बादशाहत रही है। उसी तरह जम्मू-कश्मीर में अब्दुल्ला परिवार भी एकछत्र शासन करता चला आ रहा है। वैसे भारत में लोकतंत्र की स्थापना से पहले जो राजतांत्रिक व्यवस्था थी उसमें भी एक ही वंश लगातार शासन करता था। तो उस हिसाब से वर्तमान लोकतंत्र को उसी राजतांत्रिक व्यवस्था का सुधरा हुआ रूप भी कहा जा सकता है।

संसदीय लोकतंत्र में सत्ता की चाबी वैसे तो जनता के हाथ रहती है लेकिन हमारी सोच भी परिवारवाद के इर्द गिर्द ही घुमा करती है …. वह सम्बन्धित व्यक्ति के नाते रिश्तेदार को देखकर वोट दिया करती है….जबकि सच्चाई ये है , चुनाव में राजनीतिक परिवारवाद से कदम बढ़ने वाले अधिकाश लोगो के पास देश दुनिया और आम आदमी की समस्याओ से कोई वास्ता ओर सरोकार नहीं होता ……वो तो शुक्र है ये लोग अपने पारिवारिक बैक ग्राउंड के चलते राजनीती में अपनी साख जमा लेते है …… ऐसे लोगो ने भारतीय राजनीती को पुश्तैनी व्यवसाय बना दिया है …….जहाँ पर उनकी नजरे केवल मुनाफे पर आ टिकी है….
.इसी के चलते आज वे किसी भी आम आदमी को आगे बढ़ता हुआ नहीं देखना चाहते……
वंशवाद अगर इसी तरह से अगर आगे बढ़ता रहा तो आम आदमी का राजनीती में प्रवेश करने का सपना सपना बनकर रह जायेगा ……..परिवारवाद को बढाने वाले कुछ लोगो ने राजनीती को अपनी बपोती बना कर रख दिया है……यही लोग है जिनके चलते आज “जन लोकपाल ” बिल पारित नहीं हो पा रहा है…. अन्ना सरीखे लोगो ने आज इन्ही की बादशाहत को खुली चुनोती दे दी है ……जिसके चलते खुद को सत्ता का मठाधीश समझने वाले इन नेताओ को आज उनका सिंहासन खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है..